उत्तर प्रदेश सुल्तानपुर

कोरोना पीड़ितों की मदद में इस कुनबे की समाजसेवा व उसकी चर्चा हर जुबान पर है

फैज़ खान, (लखनऊ डेस्क हेड ) : जी हाँ, जो इन दिनों चर्चा-ए-आम हैं। पहली नजर में उनकी प्रोफाइल तो यही है लेकिन आम शोहरत माफिया पप्पू बल्ली के रूप में भी है। दर्जनभर से ज्यादा मुकदमे दर्ज है, पर सज़ायाफ्ता नहीं हैं। नाम है रिजवान अहमद खां

आज उनकी सबसे ज्यादा चर्चा कोरोना पीड़ितों की मदद करने के लिए हो रही हैं। वे हर स्तर पर लोगों की मदद कर रहे। गोद मे भूख से तड़पते बच्चे व पैरों में छाले देख मन द्रबित हो गया। जिंदगी बचाने की इतनी कठिन जद्दोजहद कि न रात दिखी न दिन,धूप हो या घुप्प अंधेरा पदयात्रा करते लोगों की कतार व प्यास बुझाने के लिए जूझते लोग।

और इमदाद तलाशती नजरो को देखा आंसू निकल आये। तब से जो सिलसिला चला वो आज भी जारी है। भोजन राशन मास्क सेनिटाइजर तो बाँट ही रहे अपने मैरिज लॉन व गेस्ट हाउस को हलकान परदेशी यात्रियों के लिए खोल दिया। पप्पू बताते हैं कि 24 मार्च की रात से ही पैदल यात्रियों का कारवां आने लगा था तभी से वे सबको अपने लॉन में बुलाकर टिकाने खिलाने और खुद की गाड़ियों से बस स्टेशन पहुंचाने लगे थे इसमें उनके भाई भांजे भतीजे औऱ पत्नी का पूरा साथ मिला। प्रशासन ने उनके मैरिज हाल को रैन बसेरा बनाया उसके पहले सारी व्यवस्था वे खुद करते थे। इस बीच नवरात्र के दिनों में वे खुद गेस्ट हाउस जाकर व्रतधारियों की जानकारी लेते औऱ फलाहार करवाते थे।
दिनभर लोगों के आने जाने भोजन बनाने व बांटने में बीतने लगा। उधर, कम्प्लीट लॉकडाउन में गारमेंट फैक्ट्री बन्द हुई तो कारीगरों को मास्क तैयार करने में लगा दिया। उनका मैरिज लॉन सरकारी रैन बसेरा बना ,तब तक करीब 800 लोगो की लंच डिनर आदि से मदद कर चुके थे। फिर, जीवन रक्षा के लिए अपनी फैक्ट्री में बने मास्क व लंच पाकेट के साथ सेनिटाइजर व साबुन भी बांटने लगे। लॉकडाउन होते होते तमाम घरों में चूल्हे ठंडे होने लगे थे। रोजाना कमाने व छोटे मोटे रोजगार करने वाले बड़ी संख्या में भूख मिटाने लिए दरबदर भटकने लगे। तो उन्होंने राशन किट बांटना शुरू किया। पहले दिनभर अपनी गाड़ी से जरूरतमन्दों को पहुंचाते थे।

फिर, गरीबो के सम्मान को ठेस पहुंचने की बात समझ आयी तो दिनभर गांव व शहर के लोग चिन्हित किए जाते और राशन किट बनाकर रात में बिना बताए इन्हें पहुंचाया जाने लगा। इस तरह उन्होंने दो लाख दस हजार मास्क, 7000 लीटर सेनिटाइजर और 2000 साबुन बाँट दिया है। उन्होंने तक़रीबन 25 हज़ार से ज़्यादा परिवारों तक राशन किट पहुंचाई है। रमजान में अफ्तार व सहरी के सामानों के पाकेट भी बाँट रहे थे । उन्हें प्रशासन ने 4 दिन के लिए क्वारेन्टीन भी किया लेकिन जांच रिपोर्ट नेगेटिव पर छोड़ दिया। जन दिनों में उनके परिवार के लोग व नात रिश्तेदारों ने समाजसेवा की बाग डोर संभाले रखा। जो अब भी जारी है।

कौन हैं रिजवान अहमद खा

खुद पालिका के पूर्व सभासद रहे। उनकी पत्नी शहर से सटे ब्लॉक की प्रमुख रहीं और विधान सभा का चुनाव लड़ीं। तीन दशक साल पहले से नगर के अर्द्ध विकसित गभड़िया क्षेत्र में सक्रिय रहे पप्पू बल्ली ने पिता के व्यवसाय में हाथ बांटना शुरू किया तो फिर पीछे मुड़कर नही देखा। नेतागिरी, प्रॉपर्टी डीलिंग शुरू की तो जमीन, पैसा, व्यवसाय औऱ शोहरत भी आने लगी।

फिर, सक्रिय राजनीति में कूदे तो चर्चा में आ गए। लम्बा भरा पूरा परिवार व्यापार में जुट गया। मछली पालन के साथ अंडे देने वाली मुर्गियों का बड़ा फार्म उसी के साथ मुर्गी दाना बनाने की फैक्ट्री भी खोल ली। ईंट भट्ठा खरीदा और गारमेंट फैक्ट्री से जीन्स के पैंट जैकेट का कारोबार शुरू किया। आकर्षक मैरिज लॉन और गेस्ट हाउस बनाया। पूरा कुनबा सुबह से शाम तक मेहनत करने लगा और पप्पू बैठकबाजी व बहुजन की राजनीति। जब बीच बीच मे जेल जाते तो चर्चा में आ जाते हैं। यहां यह भी बता दूं कि कम पढ़े लिखे पप्पू बल्ली की बेटी डॉक्टर और बेटा इंजीनियर है। भतीजे सूफ़ियान की काबिलियत को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम व सुनील शेट्टी भी सम्मानित कर चुके हैं।

ये चले साथ तो कारवां बढ़ता गया

रिजवान खान ने बताया कि अचानक इतनी बड़ी आपदा व सब तक पहुंच पाना बहुत मुश्किल था लेकिन कुछ लोगों ने ऐसा साथ निभाया कि तलबगारों व मददगारों की फेहरिश्त लम्बी होती गयी इसमें सबसे ज्यादा योगदान मेरी पत्नी नरगिस नस्यब बानो का है जो मजलुमो की मदद में तत्पर होने के साथ सबको प्रेरित करती रहती है।

भाई रेहान फुरकान नदीम तबरेज फहीम बेटे सैफ सुफियान जैद अदनान भांजे सारूख व अनस। उनकी बेटी डॉ नायला रिजवान मुम्बई के फौजिया व दामाद डॉ अफ़ज़ल नायर अस्पताल में है। वहीं समधी तौकीर खान व दूसरे समधी अतहर खान व्यवसायी है। सबने गरीबो की मदद के लिए रुपये पैसों से मदद की। राम अचल मंगल नफीस सुंदर व विजय की मदद से ही यह सम्भव हो सका। प्रशासन के सहयोग से तीन वाहनों का पास मिला जो राशन किट बांटने में लगी है।

अपराध व्यवसाय माफिया गिरी से अचानक समाजसेवी बनना वैसे ही आसान नहीं जैसे वाल्मिकी का हृदय परिवर्तन अविश्वसनीय था। खुशफहमी ये भी है कि पीड़ित मानवता की मदद करने के वालों की लंबी कतार में एक और साथी शामिल हो गया।

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